Page 30 - केन्द्रीय विद्यालय वायु सेना स्थल कलाईकुंडा : विद्यालय पत्रिका 2021-22
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जहाुँ मन है लनभिर्

                                               सुष्मिता सामनता, VIII B




                                        जहाूं  मन है मनभिय और मस्तक है ऊूं चा


                                                    जहाूं ज्ञान है मुि


                                   जहाूं पृथ्वी मिभामजत नहीूं हुई है छोटे छोटे खूंडोूं में


                                       सूंकीणि स्वदेशी मानमसकता क े  दीिारोूं में


                                     जहाूँ शब्द सब मनकलते हैं सत् की गभीरता से


                           जहाूँ अमिश्ाूंत प्रयास उसका हाथ  बढा रहा है पररपूणिता की ओर

                                 जहाूं स्पष्ट  ऩॎयाय का झरना खोया  नहीूं है अपना रास्ता


                              मनजिन मरुभूमम क े मृत्ु  जैसा नकारात्मक रेत क े अभ्यास में


                                            जहाूँ मन को नेतृि द े रहे हो तुम


                              ले जा रहे हो मनरूंतर मिस्ताररत मिचार  और गमत क े  मागि को


                                       ले जा रहे हो िही स्वतन्त्ता की स्वगि को ,


                                        हे मेरे मपता , मेरे द ेश को जागृत होने दो।
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